संसार कल्पब्रृक्ष है इसकी छाया मैं बैठकर हम जो विचार करेंगे ,हमें वेसे ही परिणाम प्राप्त होंगे ! पूरे संसार मैं अगर कोई क्रान्ति की बात हो सकती है तो वह क्रान्ति तलवार से नहीं ,विचार-शक्ति से आएगी ! तलवार से क्रान्ति नहीं आती ,आती भी है तो पल भर की, चिरस्थाई नहीं विचारों के क्रान्ति ही चिरस्थाई हो सकती है !अभिव्यक्ति ही हमारे जीवन को अर्थ प्रदान करती है। यह प्रयास है उन्ही विचारो को शब्द देने का .....यदि आप भी कुछ कहना चाहते है तो कह डालिये इस मंच पर आप का स्वागत है….
" जहाँ विराटता की थोड़ी-सी भी झलक हो, जिस बूँद में सागर का थोड़ा-सा स्वाद मिल जाए, जिस जीवन में सम्भावनाओं के फूल खिलते हुए दिखाई दें, समझना वहाँ कोई दिव्यशक्ति साथ में हें ।"
चिट्ठाजगत

सोमवार, 23 मार्च 2009

माता-पिता

भगवान के दो रूप निराले,
माता-पिता के नाम वाले।
माता-पिता की क्या बटाऊ महिमा,
इनके प्यार की कोई नही सीमा।
माता पिता है क्षमा की मूर्ति,
इनकी कमी की नही करसकता कोइ पूर्ति।
इन्होने की हमारे लिये अपनी खुशियाँ कुर्बन,
हमे ईश्वर के रूप में करना है इनका गुणगान।
अगर हम लैगे जन्म हज़ार,
तब भी नही चुका सकते इनका ऋण अपार।
जिनको मिल माता -पिता के रूप में भगवान,
संसार की खुशनसीब है वो सन्तान।

6 टिप्पणियाँ:

बेनामी,  23 मार्च 2009 को 12:49 pm बजे  

माता-पिता ईश्वर का वरदान है
उनका साया अगर सर पर हो तो ......
ज़िन्दगी आसान हो जाती है !!:)

अनिल कान्त,  23 मार्च 2009 को 2:08 pm बजे  

सच ही तो कहा है अगर कोई यहाँ इस धरती पर भगवान है तो वो हैं माता पिता

मेरी कलम - मेरी अभिव्यक्ति

mamta,  23 मार्च 2009 को 3:47 pm बजे  

इसमे कोई दो राय नही है की माता-पिता से बढ़कर कोई नही होता है ।

Unknown,  23 मार्च 2009 को 4:06 pm बजे  

This is absolutely right that parents are our god on the earth. God cant be everywhere everytine thats why they sent parents for us.

......:)

mehek,  23 मार्च 2009 को 4:15 pm बजे  

matapita par ek sunder bhav hari rachana badhai

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