संसार कल्पब्रृक्ष है इसकी छाया मैं बैठकर हम जो विचार करेंगे ,हमें वेसे ही परिणाम प्राप्त होंगे ! पूरे संसार मैं अगर कोई क्रान्ति की बात हो सकती है तो वह क्रान्ति तलवार से नहीं ,विचार-शक्ति से आएगी ! तलवार से क्रान्ति नहीं आती ,आती भी है तो पल भर की, चिरस्थाई नहीं विचारों के क्रान्ति ही चिरस्थाई हो सकती है !अभिव्यक्ति ही हमारे जीवन को अर्थ प्रदान करती है। यह प्रयास है उन्ही विचारो को शब्द देने का .....यदि आप भी कुछ कहना चाहते है तो कह डालिये इस मंच पर आप का स्वागत है….
" जहाँ विराटता की थोड़ी-सी भी झलक हो, जिस बूँद में सागर का थोड़ा-सा स्वाद मिल जाए, जिस जीवन में सम्भावनाओं के फूल खिलते हुए दिखाई दें, समझना वहाँ कोई दिव्यशक्ति साथ में हें ।"
चिट्ठाजगत

मंगलवार, 2 मार्च 2010

आप

मन दर्पण है घर अगन
मन का सच्चा प्रतीविम्ब हो आप

सपना देखू हर पल में तो
उन सपनो का साथ हो आप

मन में अति भावनाओ है
उन भावो का सर हो आप

जिसे छुपाये फिरती सब से
ऐसा हसी राज़ हो आप

भाव विचरते है इस मन में
उनकी की अभिव्यक्ति हो आप

पल्को में तस्वीर सजी है
अपलक निहारू, ऐसी मूरत हो आप

4 टिप्पणियाँ:

सुरेन्द्र "मुल्हिद" 2 मार्च 2010 को 3:53 pm  

पल्को में तस्वीर सजी है
अपलक निहारू, ऐसी मूरत हो आप

bahut khoobsoorat ho aap aur aapki ye kavita...

very very good...

Amitraghat 2 मार्च 2010 को 4:51 pm  

"अंतिम दो पँक्तियाँ बेहतरीन हैं......."
प्रणव सक्सैना
amitraghat.blogspot.com

alfaz 5 मार्च 2010 को 4:32 pm  

nice written depicting pamperness and respect. nice wordings.
keep smiling.

Vijay Kumar Sappatti 14 अप्रैल 2010 को 1:53 pm  

pyaar aur pyaar aur sirf niswaarth pyaar hhi chupa hai is kavita me ..

इस गैज़ेट में एक गड़बड़ी थी.
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" अभिव्यक्ति ही हमारे जीवन को अर्थ प्रदान करती है। यह प्रयास है उन्ही विचारो को शब्द देने का , यदि आप भी कुछ कहना चाहते है तो कह डालिये इस मंच पर आप का स्वागत है…."

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