संसार कल्पब्रृक्ष है इसकी छाया मैं बैठकर हम जो विचार करेंगे ,हमें वेसे ही परिणाम प्राप्त होंगे ! पूरे संसार मैं अगर कोई क्रान्ति की बात हो सकती है तो वह क्रान्ति तलवार से नहीं ,विचार-शक्ति से आएगी ! तलवार से क्रान्ति नहीं आती ,आती भी है तो पल भर की, चिरस्थाई नहीं विचारों के क्रान्ति ही चिरस्थाई हो सकती है !अभिव्यक्ति ही हमारे जीवन को अर्थ प्रदान करती है। यह प्रयास है उन्ही विचारो को शब्द देने का .....यदि आप भी कुछ कहना चाहते है तो कह डालिये इस मंच पर आप का स्वागत है….
" जहाँ विराटता की थोड़ी-सी भी झलक हो, जिस बूँद में सागर का थोड़ा-सा स्वाद मिल जाए, जिस जीवन में सम्भावनाओं के फूल खिलते हुए दिखाई दें, समझना वहाँ कोई दिव्यशक्ति साथ में हें ।"
चिट्ठाजगत

गुरुवार, 31 दिसंबर 2009

एक प्यारी से सुबह से शुरू है

एक प्यारी से सुबह से शुरू है
ज़िन्दगी नये साल की तरह
जन्म जन्म पल रंग बदलती है
दिन और रात की तरह
इसके भी मौसम चार है
सर्दी , गर्मी, मानसून और बरसात की तरह
हर दिन एक पन्ना है ......
धूप - छाव की तरह
हर पल कुछ सीखता है
माँ - बाप की तरह
हर लम्हा गुज़र जाता है
शरीर से प्राण की तरह

फिर नया साल आता है
एक नई जन्म की तरह
इसी तरह चलता जाता है
वक्त का पहिया पिचास की तरह
सब कुछ बदल जाता है
बंद पालक के ख्वाब की तरह
रह जाते है कुछ अनुभव
कडी धूप में छाया की तरह

जीवन चलता जाता है
बिना थके , बिना रुके , अपनी गति संभाले
सीखता -सिखाता, हसाता – रुलता, बनाता - मिटाता,
हर पल को जी लैं एक जीवन की तरह
एक प्यारी से सुबह से शुरू है ज़िन्दगी नये साल की तरह

5 टिप्पणियाँ:

alfaz 2 जनवरी 2010 को 8:35 pm  

bahut hi man bhavani panktyain. naya saal apke jeevan mein dher sari khushiyan laye. God Bless u!
and Happy New year!!!!!!!!!!

Tej P Singh 2 जनवरी 2010 को 11:11 pm  

"आशा है एक नए उमंग की,
तरंग और उसके संवेग की॥
घूँघट उठाती दुल्हन २०१०...
और उसके स्पर्श की
मेरी दुल्हन २०१०
आपका स्वागत"

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