संसार कल्पब्रृक्ष है इसकी छाया मैं बैठकर हम जो विचार करेंगे ,हमें वेसे ही परिणाम प्राप्त होंगे ! पूरे संसार मैं अगर कोई क्रान्ति की बात हो सकती है तो वह क्रान्ति तलवार से नहीं ,विचार-शक्ति से आएगी ! तलवार से क्रान्ति नहीं आती ,आती भी है तो पल भर की, चिरस्थाई नहीं विचारों के क्रान्ति ही चिरस्थाई हो सकती है !अभिव्यक्ति ही हमारे जीवन को अर्थ प्रदान करती है। यह प्रयास है उन्ही विचारो को शब्द देने का .....यदि आप भी कुछ कहना चाहते है तो कह डालिये इस मंच पर आप का स्वागत है….
" जहाँ विराटता की थोड़ी-सी भी झलक हो, जिस बूँद में सागर का थोड़ा-सा स्वाद मिल जाए, जिस जीवन में सम्भावनाओं के फूल खिलते हुए दिखाई दें, समझना वहाँ कोई दिव्यशक्ति साथ में हें ।"
चिट्ठाजगत

मंगलवार, 28 अप्रैल 2009

लम्हे

वक्त की धरती पर
लम्हों के निशाँ
कभी नहीं बनते !!
लम्हे तो वैसे ही होते है
जैसे समंदर की छाती पर
अलबेली-अलमस्त लहरें
शोर तो बहुत करती आती हैं
मगर अगले ही पल
सब कुछ ........ख़त्म !!

कवि : राजीव जी की रचना

4 टिप्पणियाँ:

अनिल कान्त : 28 अप्रैल 2009 को 12:30 pm  

सब कुछ ख़त्म ....
लम्बे समय बाद दिखी आपके ब्लॉग पर रचना

मेरा अपना जहान

महामंत्री - तस्लीम 28 अप्रैल 2009 को 1:04 pm  

बहुत सुन्दर लगा आपका ब्लॉग। कविता के साथ एक महत्वपूर्ण सूक्ति भी पढने को मिली। शुक्रिया।
----------
TSALIIM.
-SBA-

priya 29 अप्रैल 2009 को 10:26 am  

lamho ko bhut hi sundar dhang se byakt kiya hai aap ne

श्यामल सुमन 2 मई 2009 को 8:19 am  

किसी शायर ने ठीक ही कहा है-

अक्ल तय करती है लम्हों का सफर सदियों में।
इश्क तय करता है लम्हों में जमाने कितने।।

सादर
श्यामल सुमन
09955373288
www.manoramsuman.blogspot.com
shyamalsuman@gmail.com

इस गैज़ेट में एक गड़बड़ी थी.
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