संसार कल्पब्रृक्ष है इसकी छाया मैं बैठकर हम जो विचार करेंगे ,हमें वेसे ही परिणाम प्राप्त होंगे ! पूरे संसार मैं अगर कोई क्रान्ति की बात हो सकती है तो वह क्रान्ति तलवार से नहीं ,विचार-शक्ति से आएगी ! तलवार से क्रान्ति नहीं आती ,आती भी है तो पल भर की, चिरस्थाई नहीं विचारों के क्रान्ति ही चिरस्थाई हो सकती है !अभिव्यक्ति ही हमारे जीवन को अर्थ प्रदान करती है। यह प्रयास है उन्ही विचारो को शब्द देने का .....यदि आप भी कुछ कहना चाहते है तो कह डालिये इस मंच पर आप का स्वागत है….
" जहाँ विराटता की थोड़ी-सी भी झलक हो, जिस बूँद में सागर का थोड़ा-सा स्वाद मिल जाए, जिस जीवन में सम्भावनाओं के फूल खिलते हुए दिखाई दें, समझना वहाँ कोई दिव्यशक्ति साथ में हें ।"
चिट्ठाजगत

बुधवार, 1 अप्रैल 2009

होठो पे हसीं देख ली

होठो पे हसीं देख ली ,दिल में नही देखा ...
यारों ने मेरे गम का समन्दर नही देखा !!

कितनी हसीन है दुनिया ये देखा है आपने ...
मर मर के जीने वालों का मंज़र नही देखा !!

शीशे के मकान तुमने बना तो लिया दोस्त ...
लेकिन वक्त के हाथ का पाथर नही देखा !!

रिश्तो के टूटने का दर्द आप क्या समझें ...
वो लम्हा कभी आप ने जी कर नही देखा !!

भटके हो रोशनी कि लिये यूँ दर बदर ...
अफ़सोस की अपनी रूह के अन्दर नही देखा !!

4 टिप्पणियाँ:

Udan Tashtari 21 अप्रैल 2009 को 2:46 pm  

सुन्दर भावपूर्ण रचना. बधाई.

मोहिन्दर कुमार 21 अप्रैल 2009 को 2:48 pm  

सुन्दर भाव अभिव्यक्ति है

रिश्तों के टूटने का दर्द आप क्या समझें
वो लम्हा कभी आपने जी कर नहीं देखा
भटके हो रोशनी के लिये यूं दर बदर..
अफ़सोस झांक कर रूह के अंदर नहीं देखा

विनय 22 अप्रैल 2009 को 5:45 pm  

वाक़ई बहुत ख़ूबसूरत ग़ज़ल।

श्यामल सुमन 23 अप्रैल 2009 को 6:51 am  

और किसी शायर की ये पंक्तियाँ देखिये-

ये फूल मुझे मुझको विरासत में है मिली।
तू ने मेरा काँटों भरा बिस्तर नहीं देखा।

पत्थर मुझे कहता है मेरा चाहनेवाला।
मैं मोम हूँ तू ने मुझे छूकर नहीं देखा।।


सादर
श्यामल सुमन
09955373288
मुश्किलों से भागने की अपनी फितरत है नहीं।
कोशिशें गर दिल से हो तो जल उठेगी खुद शमां।।
www.manoramsuman.blogspot.com
shyamalsuman@gmail.com

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