संसार कल्पब्रृक्ष है इसकी छाया मैं बैठकर हम जो विचार करेंगे ,हमें वेसे ही परिणाम प्राप्त होंगे ! पूरे संसार मैं अगर कोई क्रान्ति की बात हो सकती है तो वह क्रान्ति तलवार से नहीं ,विचार-शक्ति से आएगी ! तलवार से क्रान्ति नहीं आती ,आती भी है तो पल भर की, चिरस्थाई नहीं विचारों के क्रान्ति ही चिरस्थाई हो सकती है !अभिव्यक्ति ही हमारे जीवन को अर्थ प्रदान करती है। यह प्रयास है उन्ही विचारो को शब्द देने का .....यदि आप भी कुछ कहना चाहते है तो कह डालिये इस मंच पर आप का स्वागत है….
" जहाँ विराटता की थोड़ी-सी भी झलक हो, जिस बूँद में सागर का थोड़ा-सा स्वाद मिल जाए, जिस जीवन में सम्भावनाओं के फूल खिलते हुए दिखाई दें, समझना वहाँ कोई दिव्यशक्ति साथ में हें ।"
चिट्ठाजगत

सोमवार, 30 मार्च 2009

लङकियाँ बेवफा नही होती

वो तो मजबूरियों में लिपटी हैं !
अपने शिद्दत भरे ख्यालों में !
अपने अन्दर छुपी एक औरत में !
वो हमेशा ही ङरती रहती हैं ...
न तो जीती हैं न तो मरती हैं ...
लेकिन लङकियाँ बेवफा नही होती......!!!

पर हमेशा ही ङरती रहती हैं ...
अपने रीति और रिवाजो से ...
आने वाले नये अंजामो से चुपके से
खिले गुलबो से प्यार करती हैं और छपती हैं !
लङकियाँ बेवफा नही होती ......!!!

क्योकि मजबूरियों में लिपटी हैं ...
और हर लम्हा ङरती रहती हैं ...
अपने प्यार से अपने साये से ...
अपने रिश्तों से दिल की धड़कन से
अपनी ख्वाहिश से अपनी खुशियों से !
लङकियाँ बेवफा नही होती .......!!!

20 टिप्पणियाँ:

Shahid "ajnabi" 30 मार्च 2009 को 12:29 pm  

गार्गी जी ,
यही सच्चाई है ,कभी कोई एक लड़की के दिल को पढ़के देखे तो जानेगा की वो मजबूरियों ,समाज ,परिवार से घिरी होती हैं और उन्हें किसी एक के साथ नहीं हर किसी को देख के चलना होता है . वो किसी को रुलाना नहीं चाहती .हर किसी को ख़ुशी देना चाहती हैं मगर जाने अनजाने न जाने कैसे सामने वाला तकलीफ महसूस करने लगता है .
वो हमेशा शिद्दत से प्यार करती हैं चाहे वो माँ हो या भाई या ... की वो हमसफ़र .
औरत एक उर्दू लफ्ज़ है और उसका मेअनिंग ही पर्दा होता है ..सो वो पर्दा में रहकर अपनी शिद्दत बयां करती है ..

वाकई बहुत खूब
स्वागत है "नई कलम -उभरते हस्ताक्षर" परिवार में आपका
shahid "ajnabi"
http://www.naiqalam.blogspot.com

डॉ .अनुराग 30 मार्च 2009 को 12:57 pm  

सच कहा बस लिबास अलग है ....

neeshoo 30 मार्च 2009 को 12:59 pm  

कविता के माध्यम से बातें आपने कहीं पर सदैव तो यह सच नहीं । विचारणीय रचना । धन्यवाद

P.N. Subramanian 30 मार्च 2009 को 2:50 pm  

अच्छी रचना. आभार.

SWAPN 30 मार्च 2009 को 6:22 pm  

rachna khubsurat hai, vichar vivadaspad hain.apna apna anubhav.

आलोक सिंह 30 मार्च 2009 को 6:23 pm  

बहुत उम्दा रचना .
वो हमेशा ही ङरती रहती हैं ...
न तो जीती हैं न तो मरती हैं ...

ajay kumar jha 30 मार्च 2009 को 8:20 pm  

bahut khoob, halanki main is se kabhee sahmat nahin raha magar fir bhee aapkee baat ko nakaar nahin saktaa.

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक 30 मार्च 2009 को 8:28 pm  

औरतें बे-वफा नही होती,

मर्द भी बा-वफा नही होते।

ऐसे हालात हो गये होंगे,

सिलसिले बे-वजहा नही होते।।

bhootnath( भूतनाथ) 31 मार्च 2009 को 3:01 pm  

bhoot bhi to bewafa nahin hote....darasal koi bhi bewafa nahin hona chaahiye...aur agar jo hai....to use aadmi hi nahin honaa chaahiye....!!

विनय 31 मार्च 2009 को 3:48 pm  

कोई बेवफ़ा नहीं होता, न लड़की और न लड़का, बस समय और परिस्तिथियाँ होती हैं।

---
चाँद, बादल और शाम
गुलाबी कोंपलें

anuradhagugnani 2 अप्रैल 2009 को 10:32 pm  

जिसकी बाते दिल को छू जाये
जिसकी हँसी मन को भा जाये
ऐसी होती है लड़किया.....
आज भी परिवार से बंधी और
परिवार को बांधे हुए है
ऐसी है लड़की .........
बहुत खूब कहा आपने.....सच कहा है आपने लड़किया बेवफा नहीं होती

BAL SAJAG 8 अप्रैल 2009 को 1:56 am  

gargi jee kisi ne kaha hai
unki bee kuchh mazburiya rahi hongi
yu hi koi bewfa nahi hota...
aapki rachana kabile tarif hai bhanavo ko sabdo kee paribhasa me aapne achchhe se rakha...

Pradeep Kumar 30 मई 2009 को 9:07 pm  

wah kya baat hai !
mazbooriyaan samet kar saare jahaan ki ,
jab kuchh na ban sakaa to tera dil banaa diya.
aur ye line main jod rahaa hoon-
hamne uthaaie pyaar se nazrein tumhaari aur,
dunia ne jaane kyon hame muzrim banaa diyaa.
khanazar nahi tha haath main , aankhe bhi thi jhuki,
haule se unko dekhaa to ,
qaatil banaa diyaa.

nawab 10 जुलाई 2009 को 8:30 pm  

खता न हुशन ने की थी
गुनाह न इश्क से हुआ था
अंजाम-ऐ-मोहब्बत तो
चंद लकीरों ने बुना था

कोई बेवफा नहीं होता
नहीं इंसान गलत होते है ना ही फैसले वक़्त गलत होता है

बेनामी,  6 मार्च 2011 को 1:45 am  

achcha majaak hai. jakar kisi toote hue dil se poocho ki bewafa kaun hai.

अभिजीत 26 अक्तूबर 2011 को 10:51 pm  

कुछ तो मजबूरियां रही होंगी
यूं ही कोई बेबफा नहीं होता !

इस गैज़ेट में एक गड़बड़ी थी.
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