संसार कल्पब्रृक्ष है इसकी छाया मैं बैठकर हम जो विचार करेंगे ,हमें वेसे ही परिणाम प्राप्त होंगे ! पूरे संसार मैं अगर कोई क्रान्ति की बात हो सकती है तो वह क्रान्ति तलवार से नहीं ,विचार-शक्ति से आएगी ! तलवार से क्रान्ति नहीं आती ,आती भी है तो पल भर की, चिरस्थाई नहीं विचारों के क्रान्ति ही चिरस्थाई हो सकती है !अभिव्यक्ति ही हमारे जीवन को अर्थ प्रदान करती है। यह प्रयास है उन्ही विचारो को शब्द देने का .....यदि आप भी कुछ कहना चाहते है तो कह डालिये इस मंच पर आप का स्वागत है….
" जहाँ विराटता की थोड़ी-सी भी झलक हो, जिस बूँद में सागर का थोड़ा-सा स्वाद मिल जाए, जिस जीवन में सम्भावनाओं के फूल खिलते हुए दिखाई दें, समझना वहाँ कोई दिव्यशक्ति साथ में हें ।"
चिट्ठाजगत

बुधवार, 25 मार्च 2009

आशिकी

आशिकी में बहुत जरूरी है,
बेवफ़ाई कभी कभी कर ली।

तुम मोहब्बत को खेल कहते हो,
हम ने बरबाद ज़िन्दगी कर ली।
उस ने देखा बडी इनायत से,
आंखों आंखों में बात भी कर ली।

आशिकी में बहुत जरूरी है,
बेवफ़ाई कभी कभी कर ली।

हम नही जानते चिरगो ने,
क्यों अंधेरों से दोस्ती कर ली।
धड़्कनें दफ़न हो गयी होंगी,
दिल में दीवार क्यों खाड़ी कर ली?

4 टिप्पणियाँ:

SWAPN 25 मार्च 2009 को 6:55 pm  

sunder rachna, ek stanza aur hota to aur achha lagta.

sunil singh 22 अप्रैल 2009 को 8:18 am  

wah wah kya likha hai aapne...bahut khoob

इस गैज़ेट में एक गड़बड़ी थी.
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" अभिव्यक्ति ही हमारे जीवन को अर्थ प्रदान करती है। यह प्रयास है उन्ही विचारो को शब्द देने का , यदि आप भी कुछ कहना चाहते है तो कह डालिये इस मंच पर आप का स्वागत है…."

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