संसार कल्पब्रृक्ष है इसकी छाया मैं बैठकर हम जो विचार करेंगे ,हमें वेसे ही परिणाम प्राप्त होंगे ! पूरे संसार मैं अगर कोई क्रान्ति की बात हो सकती है तो वह क्रान्ति तलवार से नहीं ,विचार-शक्ति से आएगी ! तलवार से क्रान्ति नहीं आती ,आती भी है तो पल भर की, चिरस्थाई नहीं विचारों के क्रान्ति ही चिरस्थाई हो सकती है !अभिव्यक्ति ही हमारे जीवन को अर्थ प्रदान करती है। यह प्रयास है उन्ही विचारो को शब्द देने का .....यदि आप भी कुछ कहना चाहते है तो कह डालिये इस मंच पर आप का स्वागत है….
" जहाँ विराटता की थोड़ी-सी भी झलक हो, जिस बूँद में सागर का थोड़ा-सा स्वाद मिल जाए, जिस जीवन में सम्भावनाओं के फूल खिलते हुए दिखाई दें, समझना वहाँ कोई दिव्यशक्ति साथ में हें ।"
चिट्ठाजगत

सोमवार, 23 मार्च 2009

तपस्या

एक आदमी ने घनघोर तपस्या की
और शिवजी को प्रसन्न कर लिया।
शिवजी बोले - बेटा, मैं तुझसे बहुत खुश हूं।
कोई वरदान मांग ।
भक्त बोला - प्रभु, .....
मुझे एक गिटार दे दो।
गिटार !कैसा गधा है। शिवजी ने सोचा ।
कोई गिटार के लिए भी तपस्या करता है।
बोले - बेटा, तूने बड़ी तपस्या की है।
कुछ बड़ा मांग।
चिन्ता मत कर, सब कुछ मिलेगा।
भक्त बोला - नहीं प्रभु,
मुझे तो सिर्फ एक गिटार चाहिए
बस !शिवजी समझाने लगे - बेटा, कुछ ढंग का मांग।
मेरी रेपुटेशन का तो खयाल कर।
गिटार भी कोई मांगने की चीज है भला।
परंतु भक्त भी जिद पर अड़ा हुआ था
बोला - नहीं प्रभु,
अगर देना है तो बस गिटार ही दो !
अब शिवजी को गुस्सा आ गया,
बोले - गिटार ! गिटार ! गिटार !
अबे अगर गिटार मेरे पास होता तो
मैं ये डमरू क्यों बजाता फिरता
रचना के बारे में अपनी मह्तबपूर्ण राय बताये ताकि अगली रचना औरभी बहतर हो

2 टिप्पणियाँ:

आलोक सिंह 25 मार्च 2009 को 3:24 pm  

:) बहुत सुन्दर , मजा आ गया

इस गैज़ेट में एक गड़बड़ी थी.
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" अभिव्यक्ति ही हमारे जीवन को अर्थ प्रदान करती है। यह प्रयास है उन्ही विचारो को शब्द देने का , यदि आप भी कुछ कहना चाहते है तो कह डालिये इस मंच पर आप का स्वागत है…."

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