संसार कल्पब्रृक्ष है इसकी छाया मैं बैठकर हम जो विचार करेंगे ,हमें वेसे ही परिणाम प्राप्त होंगे ! पूरे संसार मैं अगर कोई क्रान्ति की बात हो सकती है तो वह क्रान्ति तलवार से नहीं ,विचार-शक्ति से आएगी ! तलवार से क्रान्ति नहीं आती ,आती भी है तो पल भर की, चिरस्थाई नहीं विचारों के क्रान्ति ही चिरस्थाई हो सकती है !अभिव्यक्ति ही हमारे जीवन को अर्थ प्रदान करती है। यह प्रयास है उन्ही विचारो को शब्द देने का .....यदि आप भी कुछ कहना चाहते है तो कह डालिये इस मंच पर आप का स्वागत है….
" जहाँ विराटता की थोड़ी-सी भी झलक हो, जिस बूँद में सागर का थोड़ा-सा स्वाद मिल जाए, जिस जीवन में सम्भावनाओं के फूल खिलते हुए दिखाई दें, समझना वहाँ कोई दिव्यशक्ति साथ में हें ।"
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मंगलवार, 24 मार्च 2009

मुझ से तू बार बार

मुझ से तू बार बार यूँ मोहब्बत का इज़हार न कर
न निभा सकूँगा तेरा साथ एतबार न कर !!

मोहब्बत तो होती थी पहली नज़र में
कौन है कहाँ है वो बस यह तकरार न कर !!

मैं राहे मोहब्बत का हुआ मुद्दत से मुसाफ़िर
वापसी का नही है रास्ता मेरा इंतजार न कर !!

भला पहली मोहब्बत को भी किस ने भुलाया है
सच है न यह बात मेरी तू इनकार न कर !!

किसी के नाम है यह मुख्तसिर सी ज़िन्दगी मेरी
मेरी सोचो में न तू हो शामिल मुझे बेकरार न कर !!

2 टिप्पणियाँ:

दर्पण साह 'दर्शन' 24 मार्च 2009 को 6:14 pm  

bahut badhiya...
is utkrisht si nazm mein ek nikrisht sher nera bhi...


phool banke chu paye humko kahan zustjoo,
khusboo banke bhi unko ab bekarar na kar...

merasamast 31 मार्च 2009 को 4:00 pm  

priya Gaargi, agar aap kvita ka shook rkhti hain to poets ko study karen. aapne mr.Sarwat Jamal ki ek ghazal par comment diya hai, jise dekhkar mujhe lga ki abhi aapko sahitya ka sadharan gyan bhi nahin hai. sorry,agar bura lga ho to. aapki yeh 5 rachnayen maine dekhi, inhe na kavita kahenge na geet na ghazal, kewal tookbandi hi hai ye. ucan call me at 9889478084
alka mishra
merasamast.blogspot.com

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