संसार कल्पब्रृक्ष है इसकी छाया मैं बैठकर हम जो विचार करेंगे ,हमें वेसे ही परिणाम प्राप्त होंगे ! पूरे संसार मैं अगर कोई क्रान्ति की बात हो सकती है तो वह क्रान्ति तलवार से नहीं ,विचार-शक्ति से आएगी ! तलवार से क्रान्ति नहीं आती ,आती भी है तो पल भर की, चिरस्थाई नहीं विचारों के क्रान्ति ही चिरस्थाई हो सकती है !अभिव्यक्ति ही हमारे जीवन को अर्थ प्रदान करती है। यह प्रयास है उन्ही विचारो को शब्द देने का .....यदि आप भी कुछ कहना चाहते है तो कह डालिये इस मंच पर आप का स्वागत है….
" जहाँ विराटता की थोड़ी-सी भी झलक हो, जिस बूँद में सागर का थोड़ा-सा स्वाद मिल जाए, जिस जीवन में सम्भावनाओं के फूल खिलते हुए दिखाई दें, समझना वहाँ कोई दिव्यशक्ति साथ में हें ।"
चिट्ठाजगत

मंगलवार, 19 मई 2009

हाँ बंधुओं....अब हमें इन सबकी तवज्जो करनी है....

मैं भूत बोल रहा हूँ..........!!
पूं......पूं......पूं........!!
होशियार.....खबरदार.......हर राहगुजर......!!
कुछ लोग फिर से राजा बनने जा रहे हैं.....!!
आपने उनकी तवज्जो करनी है......!!
अभी उनके भाग्य की रेखाओं की
उलटी गिनती शुरू होने वाली है....!!
अभी से हर तरफ़ नोटों के बण्डल
और पैकेजों के पैकेज धरे जा रहे हैं......!!
अभी से कितने ही लोग मैनेज किए जा रहे हैं.....!!
अभी सारी पार्टियों के दरबार खुले हुए हैं....!!
सरकार बनते ही बंद हो जायेंगे फ़िर से
इस लोकतंत्र के मन्दिर के कपाट........
आम लोगों के लिए पाँच साल के लिए बंद.....!!
इसी लोकतंत्र की हमें तवज्जो करनी है.....!!
अभी-अभी संपन्न हुए इस मन्दिर की
ठेकेदारी के चुनाव में खर्च हुए हैं
महज पचास हज़ार करोड़ रूपये.....
जो अमरीकी राष्ट्रपति के चुनाव में हुए खर्च....
आठ हज़ार करोड़ से बस कुछ ही ज्यादा है....!!
कारण.....!!अमेरिका में तो बेतरह मंदी है....!!
और भारत में शायद इसका कोई असर नहीं.....!!
एक महीने जो पापड बेले हैं इन चुनाव में हमारे नेताओं ने
उनके एक-एक पापड बेले जाने का हिसाब हमको उन्हें देना है....!!
इसीलिए हे बंधुओं...हे नागरिकों....!!
हमें इसी लोकतंत्र को तवज्जो देनी है....देनी ही है.....!!
अभी बिछी हुई हैं....सब तरफ़ ही षडयंत्र भरी बिसातें.....!!
कौन कब कहाँ घर बदल देगा,यह ख़ुद उसे भी नहीं मालूम.....!!
घोड़ा सीधा चलेगा,हाथी ढाई घर और ऊंट एक-एक डेग.....!!
और प्यादे मंत्रियों की चाल चलेंगे इस बिसात में.....!!
कोई भी राजा होगा ही नहीं इस फीचर में.....!!
और अचानक किसी फ्रेम से एक राजा निकल आएगा....
और वो देश की जनता को नचाएगा....उसका तय करेगा भाग्य
बेशक वो ख़ुद किसी और के इशारों पर नाचता मिलेगा.....!!
कभी सूना करते थे हम कि.....
राजा होता है देश का सबसे सर्वशक्तिमान....संप्रभु.....!!
आज का राजा तो नाचता है....किसी मैडम
या किसी किंग मेकर की उँगलियों पर......
तो हाँ दोस्तों....हमें लोकतंत्र की आत्मा की खातिर
इसी राजा की तवज्जो करनी है....!!
बंधुओं....अपनी आत्मा की धज्जियाँ उडाकर भी
हमें संविधान का सम्मान करना है....
हमें इन सबकी तवज्जो करनी है.....
जो उडाते हैं....हर इक पल....
हमारे भारत के संविधान की धज्जियाँ.....!!

 कवि : राजीव जी की रचना

6 टिप्पणियाँ:

मीत 19 मई 2009 को 11:45 am  

अभी बिछी हुई हैं....सब तरफ़ ही षडयंत्र भरी बिसातें.....!!
कौन कब कहाँ घर बदल देगा,यह ख़ुद उसे भी नहीं मालूम.....!!
घोड़ा सीधा चलेगा,हाथी ढाई घर और ऊंट एक-एक डेग.....!!
और प्यादे मंत्रियों की चाल चलेंगे इस बिसात में.....!!
कोई भी राजा होगा ही नहीं इस फीचर में.....!!
और अचानक किसी फ्रेम से एक राजा निकल आएगा....
और वो देश की जनता को नचाएगा....उसका तय करेगा भाग्य
क्या बात है...
बहुत अच्छी सच्चाई बयां की है....
बिलकुल सच लिखा है...
मीत

दिगम्बर नासवा 19 मई 2009 को 8:46 pm  

सच्चाई बयां की है............

विनय 19 मई 2009 को 9:57 pm  

बहुत अच्छी रचना है

प्रवीण शुक्ल (प्रार्थी) 11 जून 2009 को 12:50 pm  

और अचानक किसी फ्रेम से एक राजा निकल आएगा....
और वो देश की जनता को नचाएगा....उसका तय करेगा भाग्य
बहुत ही सुंदर अभिव्यक्ति है
सादर
प्रवीण पथिक
9971969084

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