संसार कल्पब्रृक्ष है इसकी छाया मैं बैठकर हम जो विचार करेंगे ,हमें वेसे ही परिणाम प्राप्त होंगे ! पूरे संसार मैं अगर कोई क्रान्ति की बात हो सकती है तो वह क्रान्ति तलवार से नहीं ,विचार-शक्ति से आएगी ! तलवार से क्रान्ति नहीं आती ,आती भी है तो पल भर की, चिरस्थाई नहीं विचारों के क्रान्ति ही चिरस्थाई हो सकती है !अभिव्यक्ति ही हमारे जीवन को अर्थ प्रदान करती है। यह प्रयास है उन्ही विचारो को शब्द देने का .....यदि आप भी कुछ कहना चाहते है तो कह डालिये इस मंच पर आप का स्वागत है….
" जहाँ विराटता की थोड़ी-सी भी झलक हो, जिस बूँद में सागर का थोड़ा-सा स्वाद मिल जाए, जिस जीवन में सम्भावनाओं के फूल खिलते हुए दिखाई दें, समझना वहाँ कोई दिव्यशक्ति साथ में हें ।"
चिट्ठाजगत

मंगलवार, 15 सितंबर 2009

सो जा ......

सो जा ......सो जा ......हो सो जा
राजदुलारे .......सो जा .....हो सो जा .......
तेरी चंदा जैसी माता
तेरे पिता है विधाता
और तू है सब की आँखों का तारा
सो जा ......सो जा ......हो सो जा
राजदुलारे .......सो जा .....हो सो जा .......
तेरे नन्ही नन्ही आंखे
इनमें सपने कितने सरे
इन सपनो में कही तू खो जा
सो जा ......सो जा ......हो सो जा
राजदुलारे .......सो जा .....हो सो जा .......
ला ला .....हम्म ....ला ला ......ला ला .....हम्म ....ला ला
ला ला .....हम्म ....ला ला .....ला ला .....हम्म ....ला ला

7 टिप्पणियाँ:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक 15 सितंबर 2009 को 7:50 pm  

बहुत बढ़िया लोरी लगाई है, आपने।
बधाई!

दीपक'मशाल',  16 सितंबर 2009 को 5:10 am  

काश ये लोरी आप पहले रच देतीं और मैं अपने बचपन में अपनी माँ से इसे सुन के नींद के आगोश में पहुँच जाया करता.
कविता कहानी तो सब लिखते हैं एक नयी दिशा में कलम घुमाने के लिए शुक्रिया एवं सुन्दर रचना बनाने पर बधाई.

alfaz 16 सितंबर 2009 को 12:28 pm  

इतनी प्यारी लोरी सुन के तो हर किसी को नींद आ जायेगी. बचपन की याद आ गयी, सबसे बेफिक्र दौर था ज़िन्दगी का. बहुत ही मासूमियत से लिखी गयी रचना. बधाई.

प्रकाश पाखी 16 सितंबर 2009 को 10:04 pm  

प्यारी सी लोरी,
चन्दा मामा से नानी की कहानी,माँ के आँचल का प्यार सबकुछ सहला दुलारा है इस रचना में आपने...!

Jayant chaddha 18 सितंबर 2009 को 9:27 am  

पहली बार आपके ब्लॉग पर आया... अब शायद छोड़ के जा न पाऊं....!!!
बधाई....!!!
http://nayikalam.blogspot.com/

aahsas,  23 सितंबर 2009 को 6:23 pm  

sundar,mamtamayi aur shital rachna bilkul ma ki lori ki tarah,man ko bachpna sa pulkit karne ke liye sadhoowaad..durga pujaa ki shubh kamnao ke saath.

aahsas,  23 सितंबर 2009 को 6:23 pm  

sundar,mamtamayi aur shital rachna bilkul ma ki lori ki tarah,man ko bachpna sa pulkit karne ke liye sadhoowaad..durga pujaa ki shubh kamnao ke saath.

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