संसार कल्पब्रृक्ष है इसकी छाया मैं बैठकर हम जो विचार करेंगे ,हमें वेसे ही परिणाम प्राप्त होंगे ! पूरे संसार मैं अगर कोई क्रान्ति की बात हो सकती है तो वह क्रान्ति तलवार से नहीं ,विचार-शक्ति से आएगी ! तलवार से क्रान्ति नहीं आती ,आती भी है तो पल भर की, चिरस्थाई नहीं विचारों के क्रान्ति ही चिरस्थाई हो सकती है !अभिव्यक्ति ही हमारे जीवन को अर्थ प्रदान करती है। यह प्रयास है उन्ही विचारो को शब्द देने का .....यदि आप भी कुछ कहना चाहते है तो कह डालिये इस मंच पर आप का स्वागत है….
" जहाँ विराटता की थोड़ी-सी भी झलक हो, जिस बूँद में सागर का थोड़ा-सा स्वाद मिल जाए, जिस जीवन में सम्भावनाओं के फूल खिलते हुए दिखाई दें, समझना वहाँ कोई दिव्यशक्ति साथ में हें ।"
चिट्ठाजगत

गुरुवार, 13 अगस्त 2009

दीवाना हूँ , जिन्दगी का तरफदार नहीं हूँ

यही रंग है मेरा मै अदाकार नहीं हूँ
बस बदनाम हूँ मै कलाकार नहीं हूँ

जाओ छोड़ते मुझे हो तो जाओ
बेमुरव्वत नहीं पर मै वफादार नहीं हूँ

तुमने फेंके होंगे पत्थर तोड़ने दिल
फिर भी सम्भला हूँ मै तारतार नहीं हूँ

तुम्हारी कदर है मुझे मगर फिर भी
बिन तुम्हारे खुश हूँ मै बेकार नहीं हूँ

तुमसे मोहब्बत का सिला मै जनता हूँ
पर दीवाना हूँ जिन्दगी का तरफदार नहीं हूँ

''अजीत त्रिपाठी'' जी की रचना

12 टिप्पणियाँ:

gargi gupta 13 अगस्त 2009 को 5:38 pm  

अजीत जी आप के इस सहयोग के लिए आप का बहुत-बहुत धन्यवाद .
आशा है भविष्य मैं भी आप का सहयोग और प्रेम इसी प्रकार अभिव्यक्ति को मिलता रहेगा , और आप के कविता रुपी कमल यहाँ खिल कर अपनी सुगंघ बिखेरते रहेंगे.
आप की इतनी सुन्दर रचना के लिए तहेदिल से आप का अभिवादन

alfaz 13 अगस्त 2009 को 6:08 pm  

tarafdar ke liye tarif hi niklegi.
bahut khub.

AlbelaKhatri.com 13 अगस्त 2009 को 6:18 pm  

bahut umdaa ghazal..........
bahut khoob ghazal...........
______badhaai!

विनोद कुमार पांडेय 13 अगस्त 2009 को 6:37 pm  

Gargi ji,aapke sahyog se ajit ji ki itani sundar rachana padhane ko mili...bahut bahut dhanywaad..

अर्शिया अली 13 अगस्त 2009 को 6:47 pm  

जन्माष्टमी की हार्दिक बधाई.
( Treasurer-S. T. )

ओम आर्य 13 अगस्त 2009 को 6:56 pm  

bahut hi sundar bhaaw hai apake ...........lazawaab

Mithilesh dubey 13 अगस्त 2009 को 8:48 pm  

bahut khoob ghazal. badhaai

जन्माष्टमी की हार्दिक बधाई.

विनय ‘नज़र’ 13 अगस्त 2009 को 8:56 pm  

बहुत अच्छी रचना है, जय श्री कृष्ण!

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक 13 अगस्त 2009 को 9:56 pm  

सुन्दर अभिव्यक्ति।
कृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामना.

योगेश स्वप्न 14 अगस्त 2009 को 8:23 am  

sunder abhivyakti, rachna padhane ke liye dhanyawaad.

परमजीत बाली 4 नवंबर 2009 को 2:30 pm  

बहुत बढ़िया रचना है।बधाई।

इस गैज़ेट में एक गड़बड़ी थी.
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