संसार कल्पब्रृक्ष है इसकी छाया मैं बैठकर हम जो विचार करेंगे ,हमें वेसे ही परिणाम प्राप्त होंगे ! पूरे संसार मैं अगर कोई क्रान्ति की बात हो सकती है तो वह क्रान्ति तलवार से नहीं ,विचार-शक्ति से आएगी ! तलवार से क्रान्ति नहीं आती ,आती भी है तो पल भर की, चिरस्थाई नहीं विचारों के क्रान्ति ही चिरस्थाई हो सकती है !अभिव्यक्ति ही हमारे जीवन को अर्थ प्रदान करती है। यह प्रयास है उन्ही विचारो को शब्द देने का .....यदि आप भी कुछ कहना चाहते है तो कह डालिये इस मंच पर आप का स्वागत है….
" जहाँ विराटता की थोड़ी-सी भी झलक हो, जिस बूँद में सागर का थोड़ा-सा स्वाद मिल जाए, जिस जीवन में सम्भावनाओं के फूल खिलते हुए दिखाई दें, समझना वहाँ कोई दिव्यशक्ति साथ में हें ।"
चिट्ठाजगत

शनिवार, 22 अगस्त 2009

वो पगली

मै रुका रहता हूँ ,
अक्सर वहीँ ,
जहाँ मिल जाती थीं ,
नजरें उस से ,
और वो मुस्कुरा देती थी .,

अब भी रहता हूँ ,
इन्तजार में , मै,
की निकलेगी कभी ,
फिर मिलेंगी नजरें
और , वो मुस्कुरा देगी

और इसी पश-ओ-पेश में
मेरे ख्यालों में ,
मेरे पागलपन पर,
वो पगली ,
मुस्कुरा देती है


''अजीत त्रिपाठी'' जी की रचना

16 टिप्पणियाँ:

उम्मीद 22 अगस्त 2009 को 10:31 am बजे  

अजीत जी आप के इस सहयोग के लिए आप का बहुत-बहुत धन्यवाद .
आशा है भविष्य मैं भी आप का सहयोग और प्रेम इसी प्रकार अभिव्यक्ति को मिलता रहेगा , और आप के कविता रुपी कमल यहाँ खिल कर अपनी सुगंघ बिखेरते रहेंगे.
आप की इतनी सुन्दर रचना के लिए तहेदिल से आप का अभिवादन

Tulsibhai 22 अगस्त 2009 को 11:22 am बजे  

intezar karenge ki kabhi to uski nazar milengi kabhi to uska didar hoga ....koi sak nahi is me ki rachana sandar hai ..thanx ...aisi hi rachana e aap likhte rahain ....ise request samjlo .....

-----eksacchai {AAWAZ }

http://eksacchai.blogspot.com

Dipak 'Mashal',  22 अगस्त 2009 को 2:05 pm बजे  

ek ankahe aur shuruati prem ki sundar abhivyakti...

Aadarsh Rathore 22 अगस्त 2009 को 5:41 pm बजे  

:)
मन प्रसन्न हो गया पगली

डिम्पल मल्होत्रा 22 अगस्त 2009 को 6:21 pm बजे  

और इसी पश-ओ-पेश में
मेरे ख्यालों में ,
मेरे पागलपन पर,
वो पगली ,
मुस्कुरा देती है bahut bavpuran kavita...

ओम आर्य 22 अगस्त 2009 को 6:36 pm बजे  

मनभावन कविता .......खुब्सूरत ख्याल से सज्जी और सवरी कविता......बधाई

परमजीत सिहँ बाली 22 अगस्त 2009 को 7:52 pm बजे  

अपने मनोभानोभावो को बहुत सुन्दर शब्द दिए हैं।बधाई

Blog Widget by LinkWithin
" अभिव्यक्ति ही हमारे जीवन को अर्थ प्रदान करती है। यह प्रयास है उन्ही विचारो को शब्द देने का , यदि आप भी कुछ कहना चाहते है तो कह डालिये इस मंच पर आप का स्वागत है…."
अपनी रचनाएं ‘अभिव्यक्ति' में प्रकाशित करें रचनाकारों से अनुरोध है कि 'अभिव्यक्ति' में अपनी रचना के निःशुल्क प्रकाशन हेतु वे समसामयिक रचनाएं जैसे - राजनैतिक परिदृश्य, स्वास्थ्य, जीवन, भावनात्मक संबंधों जैसे- दोस्ती, प्यार, दिल कि बातें आदि से सम्बन्धित लेख, कहानी, कविता, गज़ल व चुटकले आदि भेज सकते हैं. भेजी गयी रचनाएं मौलिक, अप्रकाशित और स्वरचित होनी चाहिए । रचनाएं यूनिकोड में ही स्वीकार्य होंगी । आप की स्वीकृत रचनाएँ आप के नाम के साथ ‘अभिव्यक्ति' में प्रकाशित की जायेंगी। रचनाएं ई-मेल द्वारा भेजी जा सकती हैं । ई-मेलः gargiji2008@gmail.com
"इस ब्लॉग पर पधारने के लिये आप का सहर्ष धन्यवाद"
यहाँ प्रकाशित रचनाओं, विचारों, लेखों-आलेखों और टिप्पणियों को इस ब्लॉग व ब्लॉग लेखक के नाम के साथ अन्यत्र किसी भी रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। (Reproduction allowed in any form strictly with the name of the Blog & Bloger.)

View My Stats

  © Blogger templates Psi by Ourblogtemplates.com 2008

Back to TOP